Spirituality

कई वर्षो बाद बन रहा हे नवरात्री में चटक योग , इस तरह करे माता रानी की घट स्थापना

सनातन काल से ही हिन्दू धर्म में हम सभी देवी-देवताओ की पूजा अर्चना करते आ रहे हे , विशेष रूप से माँ दुर्गा के  विभिन्न रूपों की साधना करने से सभी का लाभ होता हे | हर वर्ष की तरह इस बार भी माता रानी के नवरात्रों में चारों और हर्ष उल्लास का वातावरण हे | नवरात्रों की तैयारी जोरो से चल रही हे , अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की शारदीय नवरात्रि प्रारंभ होने वाली है। इस साल शारदीय नवरात्रि 10 अक्टूबर बुधवार से शुरु होगी। इस बार नवरात्रि बहुत ही शुभ योगों में पड रही है।

इस बार नवरात्रि में चटक योग बन रहा है। इस बार नवरात्रि चित्रा योग में शुरु होगी, इसके अलावा नवरात्रि में 6 विशेष योग बन रहे हैं। इस प्रकार के योगों को चटक योग कहा जाता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार इस साल नवरात्रि में देवी की आराधना बहुत ही शुभफलदायी होगी। पंडित जी ने बताया की नवरात्रि किसी साल 9 दिन की होती है और कभी किसी साल में 8 दिन की होती है। इस बार नवरात्रि आठ दिन की रहेगी और इन आठ दिनों में 6 विशेष संयोग बनेगें,जा रहे हैं। इन विशेष संयोगों से देवी आराधना का कई गुना फल प्राप्त होगा। इसमें 5 बार रवि योग और एक बार सर्वार्थ सिद्धि योग पड़ेगा ।

नवरात्री में इस-इस दिन रहेगा विशेष योग : बुधवार 10 अक्टूबर से नवरात्रि प्रारंभ हो रही है इस दिन चित्रा नक्षत्र में नवरात्रि पर्व साधना की सिद्धि और तथा कार्य में प्रगति देने वाली है। अगर हम पंचांग गणना से देखें तो नवरात्रि पर्व में 10 अक्टूबर प्रतिपदा, 12 अक्टूबर चतुर्थी और 13 अक्टूबर पंचमी को दिन रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है। इसके बाद 14 अक्टूबर षष्ठी के दिन रवि योग के साथ सर्वार्थ सिद्धी योग और 15 अक्टूबर को सप्तमी के दिन रवि योग रहेगा। वहीं 18 अक्टूबर को महाअष्टमी और गुरूवार 19 अक्टूबर को महानवमी रहेगी।

नवरात्रि घट स्थापना का पवित्र  मुहूर्त 2018 : 10 अक्टूबर को सुबह 06:18:40 से लेकर 10:11:37 तक (अवधि : 3 घंटे 52 मिनट) है। वैसे नवरात्र के प्रारंभ से ही अच्छा वक्त शुरू हो जाता है इसलिए अगर जातक शुभ मुहूर्त में घट स्थापना नहीं कर पाता है तो वो पूरे दिन किसी भी वक्त कलश स्थापित कर सकता है क्योंकि मां दुर्गा कभी भी अपने भक्तों का बुरा नहीं करती हैं।

नवरात्रों में  जानें घट स्थापना का महत्व : कलश को सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला व मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्रि के समय ब्रह्मांड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदादायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

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